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NPG ब्रेकिंग : 5 शिक्षाकर्मियों के संगठन को मिलाकर बना ‘शिक्षाकर्मी निकाय संघर्ष मोर्चा’ टूटेगा !…किसी भी वक्त वीरेंद्र दुबे अपने संगठन को मोर्चा से अलग करने का कर सकते हैं ऐलान

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रायपुर 7 दिसंबर 2017। शिक्षाकर्मी नेताओं के बढ़ते विवाद के बीच नगरीय निकाय संयुक्त संघर्ष मोर्चा में पड़ी ‘फूट’ के बाद किसी भी वक्त “टूट’ की खबरें आ सकती है। खबरें हैं कि कल या परसों तक मोर्चा के प्रांतीय संचालक वीरेंद्र दुबे अपने संगठन शालेय शिक्षक संघ को नगरीय निकाय मोर्चा से अलग करने का ऐलान कर सकते हैं। विश्वस्त सूत्रों ने इस बात को स्वीकार किया है कि वीरेंद्र दुबे मोर्चा से खुद को अलग करने का मन बना चुके हैं..और वो किसी भी वक्त अपने संगठन को इस पूरे विवादित घटनाक्रम के बाद अलग कर सकते हैं। हालांकि वीरेंद्र दुबे खुद इस पूरे मामले पर खुलकर नहीं बोल रहे। वीरेंद्र दुबे ने NPG से बातचीत के बाद ये जरूर कहा है कि

‘जिस तरह से मेरे उपर आरोप लगे, सारा ठिकरा मेरे उपर फोड़ दिया गया, ये मेरे लिये बेहद दुखद है…हमलोग एक यकीन के साथ एक-दूसरे से जुड़े थे, लेकिन पता नहीं था, इस तरह से विश्वास टूटेगा…हमें कामयाबी मिलती, तो सब की होती, नहीं मिलती, तो नाकामी सबकी कहलाती, लेकिन सिर्फ हमें ब्लेम किया गया, दुख नहीं होता, अगर मेरे पे आरोप हमारी कोर ग्रुप की मीटिंग में लगते..लेकिन सार्वजनिक तौर पर लगे आरोप से मैं बेहद आहत हूं…हालांकि मैं यही चाहूंगा, कि सारी बातें मिल बैठकर खत्म हो जाती..लेकिन शायद बात बहुत उपर जा चुकी है’

दरअसल 19 नवंबर से हड़ताल को लेकर ही विपरीत ध्रुवों के 5 अलग-अलग संगठन वीरेंद्र दुबे के शालेय शिक्षक संघ, संजय शर्मा के छत्तीसगढ़ नगरीय निकाय शिक्षाकर्मी पंचायत संघ, केदार जैन के संयुक्त शिक्षाकर्मी संघ, विकास राजपूत के नवीन शिक्षाकर्मी संघ और चंद्रदेव राय के प्रदेश शिक्षक नगरीय निकाय संघ ने एक-दूसरे का हाथ थामते हुए नगरीय निकाय संयुक्त संघर्ष मोर्चा बनाया था। हालांकि हड़ताल के दौरान भी वीरेंद्र दुबे और संजय शर्मा के बीच मनभेद बने रहे। और फिर हड़ताल टूटते ही ये मनभेद सतह पर आ गया।

किस संगठन का कितना प्रभाव 

दरअसल मूलरूप से शिक्षाकर्मी के दो बड़े संगठन का प्रतिनिधित्व वीरेंद्र दुबे और संजय शर्मा ही करते हैं…जबकि केदार जैन तीसरे नंबर और विकास राजपूत और चंद्रदेव राय का संगठन अलग-अलग क्षेत्र में प्रभावी है। एक आंकड़े के मुताबिक वीरेंद्र दुबे के संगठन का प्रभाव सरगुजा, दुर्ग में ज्यादा है, जबकि अन्य जिलों में भी वीरेंद्र दुबे का थोड़ा-थोड़ा प्रभाव है। वहीं संजय शर्मा का मूल प्रभाव बिलासपुर संभाग में हैं..बिलासपुर के आसपास के जिलों में भी संजय शर्मा का अच्छा बड़ा खेमा है । केदार जैन का बस्तर, विकास राजपूत का दुर्ग के अंदरूनी जिलों व चंद्रदेव राय का बलौदाबाजार में प्रभाव है। आंकड़ों के मुताबिक संजय शर्मा के साथ करीब 55 से 60 हजार, तो वीरेंद्र दुबे के पास भी उतने ही शिक्षाकर्मी हैं.. केदार जैन के पास भी 35 से 40 की संख्या है। 

किसका कितना दबदबा 

दरअसल संजय शर्मा, वीरेंद्र दुबे और केदार जैन तीनों शुरू से ही अलग-अलग प्रतिनिधित्व करते रहे हैं। साल 1995-96 में केदार जैन शिक्षक गारंटी गुरूजी के प्रदेश अध्यक्ष थे। वीरेंद्र दुबे संविदा शिक्षाकर्मी संघ के प्रदेश अध्यक्ष थे, जबकि संजय शर्मा छत्तीसगढ़ शिक्षाकर्मी संघ के प्रदेश अध्यक्ष थे। शिक्षक गारंटी गुरूजी संघ ने संघर्ष कर पहले संविदा शिक्षाकर्मी संघ में अपना संविलियन कराया और फिर संविदा शिक्षाकर्मी के साथ संघर्ष कर वीरेंद्र दुबे ने शिक्षाकर्मी संघ में संविलियन कराया।

पहले साथ-साथ थे संजय-केदार व वीरेंद्र 

2005 में शिक्षाकर्मी संघ में विलय होने के बाद दोनों अलग-अलग संगठन के प्रदेश अध्यक्ष एक साथ थे, लेकिन पहले 2006 में वीरेंद्र दुबे और फिर 2009 में केदार जैन संजय शर्मा के संगठन से अलग हो गये।

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