ये IAS कभी ठीक करते थे साइकिल का पंक्चर, पिता की मौत के बाद पूरा परिवार भूख से था परेशान…. 10वीं के परीक्षा परिणाम ने बदली जिंदगी.. जानिए इस अफसर के बारे में

नईदिल्ली 21 अक्टूबर 2019। कहते हैं अगर हौसले बुलंद हों और आत्मविश्वास मजबूत हो तो हर इंसान अपने सपनों को पूरा कर लेता है। दुनिया की सारी तकलीफों को पीछे छोड़ते हुए सफलताओं के डगर में आगे बढ़ता रहता है। इसी बात को सच कर दिखाया है महाराष्ट्र के एक छोटे से शहर बोइसार के रहने वाले वरुण बरनवाल ने। पंक्चर की दुकान चलाकर अपने परिवार के लिए दो वक्त की रोटी का इंतजाम करने वाला आज आईएएस अधिकारी है।

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पंक्चर की दुकान चलाकर अपने परिवार के लिए दो वक्त की रोटी का इंतजाम करने वाला आज आईएएस अधिकारी है। वरुण ने एक समय अपनी स्कूल की पढ़ाई छोड़ साइकिल के पंक्चर लगाने का काम शुरू किया था। पिता की मौत के बाद पूरा परिवार भूख से परेशान था। ऐसे में बचपन से पढ़ाई में अव्वल रहे वरुण ने 10 वी कक्षा की परीक्षा देने के बाद से अपने परिवार का दायित्व संभाला और अपने पिता के साइकिल मरम्मत की दुकान को चलाने लगा। वह दिन रात अपनी किताबों से दूर साइकिल के पंक्चर लगाता था। लेकिन उसका मन हमेशा पढ़ाई में ही रहा।

2006 में हो गई थी पिता की मृत्यु

साल 2006 नें वरुण ने अपने पिता को खो दिया था। बड़ा बेटा होने के नाते उन्होंने घर की जिम्मेदारी उठाने का फैसला किया। वरुण ने सोच लिया था कि पढ़ाई छोड़कर उन्हें पिता की साइकिल की दुकान संभालनी है। 10वीं की परिक्षा देने के बाद उन्होंने साइकिल की दुकान पर पंचर लगाना शुरू किया। लेकिन जब 10वीं के परीक्षा परिणाम आए, तो उनकी जिंदगी ने एक अलग मोड़ लिया।

10वीं के परीक्षा परिणाम ने बदली जिंदगी ..

वरुण ने 10वीं की परीक्षा में टॉप किया था। वो पूरे गांव में सबसे ज्यादा अंक हासिल करने वाले छात्र थे। पढ़ाई में बेटे की दिलचस्पी को देख मां ने वरुण का दाखिला हाई स्कूल करवाया और खुद दुकान की जिम्मेदारी उठा ली। हालांकि, वरुण ने काफी समय तक परिवार का बेट पालने के लिए अपनी साइकिल की दुकान पर पंचर लागाए।

इंजीनियरिंग कॉलेज में लिया एडमिशन

उनके पिता के एक दोस्त ने पढ़ाई में वरुण की लगन को देखकर उनका एडमिशन इंजनीयरिंग कॉलेज में करवा दिया। वरुण ने एकेडमिक मेरिट स्कॉलरशि‍प हासिल की, जिससे फीस का खर्च बचा। कुछ शिक्षकों ने भी आर्थिक तौर पर उनकी मदद की। वो कहते हैं कि उन्हें इस मुकाम तक पहुंचाने में कई लोगों का हाथ है।

एक बार में पास की यूपीएससी की परीक्षा

साल 2011 में चीजें बदल गईं। उन्होंने अन्ना हजारे के जनलोकपाल बिल के आंदोलन में भी हिस्सा लिया। इंजीनियरिंग पास करने के बाद वरुण ने प्राइवेट सेक्टर में नौकरी ना करके फैसला किया और आईएएस की तैयारी शुरू की। घर वालों ने सिर्फ एक वर्ष का समय दिया था। लोगों के भरोसे और अपनी मेहनत के दम पर उन्होंने एक ही बार में यूपीएससी की परीक्षा पास की। उन्होंने देश में 32वां रैंक हासिल किया था।
वरुण पढ़ाई के साथ-साथ समाज सुधारक कार्य में भी तत्पर रहता था। उसने अन्ना हजारे के जनलोकपाल बिल के आंदोलन में भी हिस्सा लिया था। इंजीनियरिंग पास करते ही वरुण ने यूपीएससी की परीक्षाओं की तैयारी शुरू कर दी थी। पढ़ाई के लिए अपने 8 साल की कड़ी मेहनत के बाद वरुण ने आखिरकार यूपीएससी की परीक्षा में देश में 32 वा रैंक हासिल किया। कभी साइकिल का पंक्चर ठीक करने वाला वरुण आज अपने हौसले के बल पर आईएएस अधिकारी बन गया है। वह गुजरात के हिम्मतनगर का एसिसटेंट कलेक्टर है।

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